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પ્રેમ એક અનુભૂતિ

જેવો હતો એવો હું તમારો હતો બીજા બધાં કરતાં તો રુડો રુપાળો હતો કેટ કેટલાનાં દિલ તોઽયા છે તમે તો એ વાતથી હું કયાં અજાણ્યો હતો ઘવાઈશ આખરે એ હું જાણતો હતો તો પણ તમારી મોહમાયામાં કેમ ફસાયો હતો? મનોમન તમને ચાહવા હું લાગ્યો હતો તમને બદલવાના સપના જોવા લાગ્યો હતો પ્રેમનો અર્થ હું ક્યાં … Continue reading પ્રેમ એક અનુભૂતિ

दिल से जुदा हो सके न कभी

माना तुम पास हमारे थे न कभी फिर भी इस दिल से जुदा हो सके न कभी दिल तो है दिल ओ सनम टूट जाए जो कभी टूटे टूकड़े भी जुदा होकर जुड़ पाए न कभी माना तुम पास हमारे थे न कभी फिर भी इस दिल से जुदा हो सके न कभी दिल के … Continue reading दिल से जुदा हो सके न कभी

होठों को मेरे

होठों को मेरे आ छू ले तू ये रात कहीं बित जाए ना जाम से जाम जो टकराए यूँ होश कहीं अब खो जाए ना इसका नशा हमें चढ़ गया जो गुस्ताखी कोई हमसे हो जाए ना शीशे की बोतल पे लिखा तेरा नाम हर घूँट में तुजे आ अब पी लूं मैं बुझा दे … Continue reading होठों को मेरे

તું પ્રકાશનું કિરણ

તું છે પ્રકાશનું કિરણ સમો તું છે આ જગતનો દાતા તુજ વિના ન મળે રાહ રાહગીરને તુજ બિન પથિક છે ભટક્યો તુજની કૃપા થાય જેના પર મંજિલ આવે પથિક સમીપે તારી કૃપાથી જગ આખામાં થાયે અશક્ય સઘળું શક્ય તુજમાં જ સમાઈ જવાને તો લીધા કેટ કેટલા જન્મો મેં તારી અનુકંપાથી પામું તુજને તારા મિલનનો છું … Continue reading તું પ્રકાશનું કિરણ

सर्वत्र

सबका हो कल्याण सदा यह विचार करे ‘सर्वत्र’ सबका साथ मिले एक साथ मांगे इतना ही ‘सर्वत्र’ दीन-दुखियों की पीड़ा समजे साथ तेरे मिलकर ‘सर्वत्र’ बांटे शिक्षा अन्न वस्त्र सबके साथ मिलकर ‘सर्वत्र’ चल गाँव-गाँव गली-गली मुश्किलें हो आसान ‘सर्वत्र’ भाई-बहन बच्चे-बुज़ुर्ग भी पा सके सहाय ‘सर्वत्र’ करे विकास बांटे अब खुशियाँ नई उम्मीद जगाये … Continue reading सर्वत्र

उड़ना चाहूँ

मेरी व्यथा मैं किसे बतलाऊँ ? मेरी आस कब होंगी पूरी ? हँसना चाहूँ, खेलना चाहूँ रंग सुनहरी इस दुनिया में भरना चाहूँ मेरा दिल भी धड़कना चाहे आसमान मैं उड़ना चाहे न कोई बड़ी मेरी चाह है मेरी तो बस अनसूनी एक बात है कहना चाहूँ, समजाना चाहूँ मेरी बात मैं आज बतलाना चाहूँ … Continue reading उड़ना चाहूँ

मैं भोला भंडारी

काल कहे, कहे कोई भोला मैं तो हूँ इस जग का दाता इस संसार की रीत निराली जो खोये सो मुजको पाता सकल सृष्टि का मैं कर्ताहर्ता सबका हूँ मैं ही रखवाला न आदि न अंत है मेरा इस जग से अनूठा मेरा नाता मेरी गाथा कैसे कहूँ मैं ? तुज में ही मैं हूँ … Continue reading मैं भोला भंडारी

खुद से ही जुदा हो गयी मैं

तुजसे जुदा मैं यूँ  हुई मानो खुद से ही जुदा हो गयी रोई, तडपी, थोड़ी सहम गई तेरे इंतज़ार में सदियाँ यूँही बीत गई अब लौट के वापस क्यों आया तू? जब तोड़ के जाना था दिल के सारे अरमाँ यूँ कोई तो वजह होगी तेरी बेवफाई की ? जो दे गया मुजको सजा तन्हाई … Continue reading खुद से ही जुदा हो गयी मैं