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इश्क की डोर

कैसे ये इश्क की डोर मेरे गले का फंदा बन गई कैसे ये तेरी मुस्कुराहट सिने की चुभन बन गई बिन तेरे सूनी थी जीवन की डगर न था पहले कोई मेरा हमसफ़र     तेरे आने से दिल को राहत मिली जीने की मुज में कुछ आस जगी ना था मैं तुजसे बेवफ़ा, ना मैं खुदसे … Continue reading इश्क की डोर

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मोरा पिया मोसे रूठो ना

मोरा जिया तुम बिन कैसन लागो रे मोरा जिया तुज बिन तडपे पिया रे मोरा पिया मोसे रूठो ना मोरा जिया तुम बिन लागे ना सुद्बुध खोयो चैन गवायो बात ये  मोरी माने ना मोरा पिया मोसे रूठोना मोरा जिया तुम बिन लागे ना नैनन मोरे आस लगावे पिया मिलन की प्यास जगाए  मोरा पिया … Continue reading मोरा पिया मोसे रूठो ना

नीले आकाश में

बने हम एकदूजे के लिए, रहे एक दूजे संग कहे ना हम भी किसीसे, कितना चाहे हम मेरे आगे आगे तू, तेरे पीछे पीछे मैं तोड़ के सारी ज़ंजीरे, आ उड़ चले हम नीले आकाश में, एकदूजे के संग भर दे खुशियों के रंग, जब हमतुम संग-संग न रहे कोई फिकर, जब हो हमतुम एकरंग … Continue reading नीले आकाश में

बिन तेरे कटे ना ये रतियाँ

तू  मुजसे  मिले  यूँ  मिलता  रहे दिल  तुजसे  कहे  यूँ कहता रहे तू  जो मिला जहाँ की सारी खुशियाँ मिली बिन तेरे कटे ना अब ये तन्हाई  पिया आँसू मेरे कहे  की अब तू न जा बिन तेरे कटे ना अब ये रतियाँ                                                  मैं  हूँ तेरी  कहे ये  मेरे नैननवा तू  है  मेरा  कहे ये … Continue reading बिन तेरे कटे ना ये रतियाँ

न कसूर उनका

न कसूर उनका, न था मेरा फिर  खता किस  से हुई ? हुए लापता उनके लबों पे अलफाज़ बेजुबां  हम  भी  थे अबतलक बेपनाह मोहब्बत हम करते थे उनसे दामन में खुशियाँ भी लुटाते थे उनके वक्त ने ये कैसी सज़ा दी हमको होके भी उनके हो सके न कभी वो न थे बेवफ़ा, यारों … Continue reading न कसूर उनका

ना तू मुजसे जुदा

ना तू है मुजसे जुदा ना हूँ मैं तुजसे जुदा कह दे तू अब मुजसे हो गया है प्यार तुजे क्यों मैं कहूँ तुम्हे भला करती हूँ तुजसे प्यार क्यों मैं कहूँ तुम्हे भला करती हूँ तेरा इंतज़ार क्या तू ना जाने रे जो है इस दिल में मेरे क्या मैं ना जानूं रे जो … Continue reading ना तू मुजसे जुदा

खुदसे हुआ रूबरू

खुदसे   हुआ  मैं   रूबरू जबसे मिला तुजे ओ यारां जो भी कहे अब ये ज़माना मैं  तो  हुआ तेरा  दीवाना तू है मेरे दिलों की आरज़ू तू ही मेरी सांसों की सरगम तेरे बिन अब ना जिऊँ यारां बिन  तेरे  मैं  मर  जांवा तू ही तो है मेरा कारवां तू है इस दिल की दुआ … Continue reading खुदसे हुआ रूबरू

दिल क्यों लगा नहीं?

जिसकी तलाश में निकले थे घर से वो मंज़र हमें क्यों दिखा नहीं  ? जिस बूँद के एहसास को थे हम तडपे वो बारिश ने हमें क्यों भिगोया नहीं ? एक तेरी जुस्तजू थी इस दिल को मेरे कुर्बत से तेरी सुकून क्यों मिला नहीं ?  वजूद ढूंढने निकले थे हम सफ़र में आईने में … Continue reading दिल क्यों लगा नहीं?