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दुनिया के राज़

रोज़ रोज़ के तानों से मैं हुआ हूँ परेशान नहीं समज आता मुझको यह गणित और विज्ञान   कई राज़ है दुनिया में उन्हें समजना चाहूँ मैं रहता कहाँ है रातभर सूरज समज न पाऊँ मैं   कभी हमें चुभते नहीं यह कैसे घडी के कांटे कहाँ से आते है यह फूल स्मित सभी में … Continue reading दुनिया के राज़

कोई उम्मीद

कोई उम्मीद ना थी बाकी अब उनके आने की...... ना थी मालूम कोई वजह उनके चले जाने की...... वक्त ठहेरा ठहेरा सा अब तो है लगे तिनका तिनका बिखरा सा क्यों लगे टूटे सारे सपने जो थे हमने सजाये यादें बस उनकी अब हमें तो रुलाए कोई उम्मीद ना थी बाकी अब उनके आने की...... … Continue reading कोई उम्मीद

मम्मी मेरी सुपर वुमन

नाम है यूँ तो उसका सुमन पर मम्मी मेरी सुपर वुमन ना एक पल की फुर्सत कभी काम करती वो घर के सभी   ध्यान सभी का रखती वो आराम कभी ना करती वो दादा दादी को भी दवाई समय पर रोज़ देती वो   स्कूल जाने को सुबह उठाती मुझे नहलाते खूब हँसाती दूध … Continue reading मम्मी मेरी सुपर वुमन

चीकू की आदत

धूम है ना धड़ाका है छाया अजब सन्नाटा है लट्टू है ना शहनाई है आज फिर हुई पिटाई है   सबके दिलों का शहज़ादा आज सभी से रूठा है उधम मचाता चीकू आज चुपचाप कोने में बैठा है   अपने पसंद की रबड़ी को देखता है ना छूता है आँसू गिरती आँखों से बस दीवार … Continue reading चीकू की आदत

तितली बन कर गाऊँ

तितली बन कर मैं उडूं संग हवाओं के झूमूँ ऐसा हो तो कैसा हो?   रंग बिरंगी फूलों को मैं गीत नए सुनाऊँ उनको मेरे रंग रंगाऊँ बस इतना ही चाहूँ मैं तितली बन कर गाऊँ   नील गगन के इन्द्रधनुष को सात सूर मैं सिखाऊँ ताल की मात्रा गिनाऊँ बस इतना ही चाहूँ मैं … Continue reading तितली बन कर गाऊँ

छोटा मग्गू

बात किसी की सुने ना मग्गू अपने मन की करता है   तीन बरस का छोटा मग्गू हरदम खेलता रहता है   सबको रात सुलाके सोता पर जल्दी सुबह उठता है   उठ के सबको जगाता मग्गू पापा को भगाता है   खाता और खिलाता है फुरती के राज़ बताता है   ककड़ी टमाटर सेब … Continue reading छोटा मग्गू

मच्छर की नाईट डयूटी

खींच बिछौना सोया श्याम रात में लेकर प्रभु का नाम   जाड़े के दिन शुरू हुए है पंखा भी आराम करे है   देर रात जब हुआ सन्नाटा कोने से निकला मच्छर मोटा   हवा थमी थी, मच्छर की नाईट डयूटी लगी थी   गुन-गुन करता पहुँचा पास आज मिली है दावत खास   चुपके … Continue reading मच्छर की नाईट डयूटी

HIDE & SEEK ( સંતાકૂકડી)

નાનપણમાં રજાઓના દિવસોમાં મામાને ઘરે અમદાવાદ જતો ત્યારે શેરીમાં લગભગ રોજ સાંજે અમે બધા મિત્રો સંતાકૂકડી રમતા. આ વાત હશે લગભગ પાંચમાં કે છઠા ધોરણની. મને યાદ છે કે આમતો હું બધાને શોધી કાઢતો પણ મારો ખાસ મિત્ર મંથન એવી જગ્યાએ છૂપાતો કે હું ગમે તેટલો પ્રયત્ન કરું પણ એને શોધવામાં નિષ્ફળ જ રહેતો અને … Continue reading HIDE & SEEK ( સંતાકૂકડી)

अपनी तकदीर को

तुम जो मेरी तरह हालात से बेबस न होते अपनी तकदीर को बेवजह कोसते न होते   ख़याल आता है कभी तुमसे मिलकर मैं पूछूँ बीते लम्हों से और तेरी नम पलकों से पूछूँ   क्या थी कोई कमी मेरे इरादों में या फिर यही लिखा था हमारी लकीरों में   मिलकर हम फिर यूँ … Continue reading अपनी तकदीर को

बाबा की दुआ

बाबा की दुआ × (4) संग हो जिसके झोली में उसके खुशियाँ भरी हो सदा   बाबा की दुआ..... ×(2)   साथ न तेरे जो कोई खड़ा हो दिल में अँधेरा छाया घना हो दिया बनके राह दिखाए वो सखा बनके साथ निभाए वो   उसने सबका सुना हो भला या बुरा   बाबा की … Continue reading बाबा की दुआ

ये जो जनम मिला

ये जो जनम मिला है बाबा ये जो नाम मिला है चरणों में अरपन तेरे कर दूँ ये जो दाम मिला है   तू है साईं सबका मालिक तू ही हर नैया का नाविक भवसागर को पार कराए जनम जनम की प्यास बुझाए   चरणों में अरपन तेरे कर दूँ ये जो जनम मिला है … Continue reading ये जो जनम मिला