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सर्वत्र

सबका हो कल्याण सदा यह विचार करे ‘सर्वत्र’ सबका साथ मिले एक साथ मांगे इतना ही ‘सर्वत्र’ दीन-दुखियों की पीड़ा समजे साथ तेरे मिलकर ‘सर्वत्र’ बांटे शिक्षा अन्न वस्त्र सबके साथ मिलकर ‘सर्वत्र’ चल गाँव-गाँव गली-गली मुश्किलें हो आसान ‘सर्वत्र’ भाई-बहन बच्चे-बुज़ुर्ग भी पा सके सहाय ‘सर्वत्र’ करे विकास बांटे अब खुशियाँ नई उम्मीद जगाये … Continue reading सर्वत्र

उड़ना चाहूँ

मेरी व्यथा मैं किसे बतलाऊँ ? मेरी आस कब होंगी पूरी ? हँसना चाहूँ, खेलना चाहूँ रंग सुनहरी इस दुनिया में भरना चाहूँ मेरा दिल भी धड़कना चाहे आसमान मैं उड़ना चाहे न कोई बड़ी मेरी चाह है मेरी तो बस अनसूनी एक बात है कहना चाहूँ, समजाना चाहूँ मेरी बात मैं आज बतलाना चाहूँ … Continue reading उड़ना चाहूँ

मैं भोला भंडारी

काल कहे, कहे कोई भोला मैं तो हूँ इस जग का दाता इस संसार की रीत निराली जो खोये सो मुजको पाता सकल सृष्टि का मैं कर्ताहर्ता सबका हूँ मैं ही रखवाला न आदि न अंत है मेरा इस जग से अनूठा मेरा नाता मेरी गाथा कैसे कहूँ मैं ? तुज में ही मैं हूँ … Continue reading मैं भोला भंडारी

खुद से ही जुदा हो गयी मैं

तुजसे जुदा मैं यूँ  हुई मानो खुद से ही जुदा हो गयी रोई, तडपी, थोड़ी सहम गई तेरे इंतज़ार में सदियाँ यूँही बीत गई अब लौट के वापस क्यों आया तू? जब तोड़ के जाना था दिल के सारे अरमाँ यूँ कोई तो वजह होगी तेरी बेवफाई की ? जो दे गया मुजको सजा तन्हाई … Continue reading खुद से ही जुदा हो गयी मैं

मैं गीत गाता चला

गीत गाता चला मैं यूँ गुनगुनाता चला तेरे कदमों में यूँ ही सिर झुकाता चला मेरी ख्वाहिशों को तू पूरा करता सदा नग्मे वफ़ा के मैं यूँ ही गाता चला मेरे हाथों में जब एक तेरा हाथ हो तेरे नक़्शे क़दम पे मैं चलता रहूँ बातें बनती रहे शामें ढलती रहे तेरे ही रेहम-ओ-करम से … Continue reading मैं गीत गाता चला

મુજમાં તું

મુજમાં મારું કછું ના રહ્યું જયારે તુજમાં મને સઘળું મળ્યું તુજમાં જ ભળીને હું જાણ્યો મુજમાં તો મારું કછું ન હતું જયારે મુજમાંથી મુજનું વિસર્જન થયું ત્યારે તુજમાં મુજને સઘળું મળ્યું તુજમાં સઘળું પામીને હું મુજને આજે જાણ્યો મુજ કરતાં હું તુજમાં આજે સઘળું પામ્યો તુજ કરતાં હું મુજમાં કેમ કાંઈ ન પામ્યો? મુજ કરતાં … Continue reading મુજમાં તું

अनकही बातें

कल जो हमतुम यूँ मिले मिलके मुजको अच्छा लगा कोई तो बात थी तुजमें जो मिलके यूँ अपना सा लगा पहली ही मुलाकात में दिल को न जाने क्यों तू सच्चा लगा तुजसे मिलके ये दिल मेरा न जाने क्यों बेकरार हुआ हकीकत था या कोई तू सपना जो तुज में यूँ मैं खोने लगी … Continue reading अनकही बातें

नया सवेरा

एक दिन होगा ‘नया सवेरा’ जिस दिन होगा खुद से तेरा मिलना चलना है तुजे चलना है ज़िन्दगी की राहों पे चलते रहना है परिश्रम है तेरा मंत्र हार के कहीं न तुजे रुकना है कमज़ोर नहीं है तु औरो से मुज पे भरोसा तुजे रखना है एक दिन होगा ‘नया सवेरा’ जिस दिन होगा … Continue reading नया सवेरा

माँ मेरी माँ

माँ के पेट से अब मैं आना चाहूँ सारी दुनिया अब देखना चाहूँ माँ के आँचल में है जग सारा माँ की बातों में लगे सब प्यारा माँ के जज़्बात  मैं समज न पाऊं माँ के अरमान पूरे कर न पाऊं भले  ही माँ मुझे देख न पाए फिर भी जतन मेरा करती हमेशा माँ … Continue reading माँ मेरी माँ

होमवर्क

जो न करू होमवर्क, टीचर डांटे दिनभर इतना मिले होमवर्क, पूरा न हो रातभर जब मैं खेलु जब मैं गाऊं, मम्मी पुछे 'होमवर्क'? चुप चुपके जब TV चलाऊ, छोटा भीम भी पुछे 'होमवर्क'? Syllabus मेरा Vast है, हर Monday मेरा Test है न लाऊ जो मैं अच्छे मार्क, Tution जाना भी Waste है दिनभर स्कूल … Continue reading होमवर्क