पास मेरे आ जाओ

कहने को तो कुछ भी नहीं है
अरमां दिल के अब भी वही है

खामोशी की ज़ुबां समझकर
आँखों से इस दिल में उतरकर

पास मेरे तुम आ जाओ
थोड़े पास मेरे आ जाओ
और हमें ना यूँ तडपाओ
पास मेरे तुम आ जाओ

चंद लम्हें किस्मत से मिले है
गुलशन में भी फूल खिले है

इन फूलों की भाषा समज लो
मुझे अपनी साँसों में भर लो

इस पल को यूँ ना गवाओ
थोड़े पास मेरे आ जाओ
शर्म-ओ-हया के परदे गिराओ
पास मेरे तुम आ जाओ

तुम बुध्धु थोड़े नासमझ हो
कहने को तीरंदाज़ महज़ हो

हाल-ए-दिल को कब समजोगे
हाथ मेरा तुम कब थामोगे

दूरियाँ अब यह मिटाओ
थोड़े पास मेरे आ जाओ
हाथ अपना तुम बढाओ
पास मेरे आ जाओ

– Registered and Copyrights @ Karta

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