अनकही बातें

कल जो हमतुम यूँ मिले
मिलके मुजको अच्छा लगा

कोई तो बात थी तुजमें
जो मिलके यूँ अपना सा लगा

पहली ही मुलाकात में दिल को
न जाने क्यों तू सच्चा लगा

तुजसे मिलके ये दिल मेरा
न जाने क्यों बेकरार हुआ

हकीकत था या कोई तू सपना
जो तुज में यूँ मैं खोने लगी

बातों बातों में ही न जाने कब
तेरी  मैं  यूँह  होने लगी

हम मिले क्या कल फिर वहाँ?
जहाँ मिले थे दो दिल जवां

तुजको यूँ रोज़ मिलती रहूँ
मिलके बातें तेरी सुनती रहूँ

बातों बातों में तुजसे अपनी
अनकही बातें सुनाती रहूँ

दिल की बातों को मेरी मैं
तुजको यूँ बतलाती रहूँ

रातों में अब तुजे ही तो
miss मैं करती रहूँ

फोन में अब मेरे यूँह
फोटो तेरी क्यों देखा करूँ

फोटो से तेरी  मैं
रातभर बातें करती रहूँ

बातों बातों में यूँही
इस दिल की बातें बतलाती रहूँ

सारी रात मैं इस कदर
तुजसे बातें करती रहूँ

हम मिले क्या कल फिर वहाँ?
जहाँ मिले थे दो दिल जवां

तुजसे मिलकर इस दिल की मैं
अनकही बातें बतलाती रहूँ

– © KARTA™ Regd. No. 105126644555

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